श्री कृष्ण : भगवान है या बलात्कारी..???

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श्री कृष्ण : भगवान है या बलात्कारी..???

दशरत राम यदि ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहलाता हैं
तो वासुदेव नंदन कृष्ण ‘लीला पुरुषोत्तम’ अर्थात कृष्ण
अपनी अनोखी लीलाओ के कारण जन सामान्य में अधिक लोकप्रिय रहे हैं.

संभवत: कृष्ण का बचपन नंदगांव और गोकुल में गोपियों के बीच
बीता. कृष्ण औरतो के मामले में शुरू से ही स्वतंत्र विचार के थे.
पुराणों के अनुसार उनका मिजाज़ लड़कपन से ही आशिकाना मालूम होता हैं.
गोपियों के साथ कृष्ण का यौन सम्बन्ध था इस विषय
में लगभग सारा कृष्ण साहित्य एकमत हैं. इन गोपियों में विवाहित और
कुमारी दोनों प्रकार की थी वे अपने पतियों, पिताओ और
भाइयो के कहने
पर भी नहीं रूकती थी:
‘ ता: वार्यमाणा: पतिभि:
पितृभिभ्रातृभि स्तथा,
कृष्ण
गोपांगना रात्रौं रमयंती रतिप्रिया :’
-विष्णुपुराण, 5, 13/59.
अर्थात वे रतिप्रिय गोपियाँ अपने
पतियों,
पिताओं और भाइयो के रोकने पर भि रात में
कृष्ण के
साथ रमण करती थी.

कृष्ण और गोपियों का अनुचित सम्बन्ध
था यह बात
भागवत में स्पष्ट रूप से मोजूद हैं,
ईश्वर अथवा उस के अवतार माने जाने वाले
कृष्ण का जन
सामान्य के समक्ष अपने ही गाँव की बहु
बेटियों के साथ सम्बन्ध रखना क्या आदर्श
था ?

कृष्ण ने गोपियों के साथ साथ ठंडी बालू
वाले
नदी पुलिन पर प्रवेश कर के रमण किया.
वह स्थान
कुमुद की चंचल और सुगन्धित वायु आनंददायक
बन
रहा था. बाहे फैलाना, आलिंगन करना,
गोपियों के हाथ
दबाना, बाल (चोटी) खींचना, जंघाओं पर
हाथ फेरना,
नीवी एवं स्तनों को चुन, गोपियों के नर्म
अंगो नाखुनो से नोचना, तिर्चि निगाह से
देखना,
हंसीमजाक करना आदि क्रियाओं से
गोपियों में
कामवासना बढ़ाते हुए कृष्ण ने रमण किया.

-श्रीमदभागवत महापुराण 10/29/45
कृष्ण ने रात रात भर जाग कर अपने
साथियो सहित
अपने से अधिक अवस्था वाली और माता जैसे
दिखने
वाली गोपियों को भोगा.
– आनंद रामायण, राज्य सर्ग 3/47
कृष्ण के विषय में जो कुछ आगे पुरानो में
लिखा हैं उसे
लिखते हुए भी शर्म महसूस होती हैं
की गोपियों के
साथ उसने क्या-क्या किया इसलिए में निचे
अब
सिर्फ हवाले लिख रहा हूँ जहा कृष्ण ने
गोपियों के
यौन क्रियाये की हैं-

– ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4,
अध्याय
28-6/18, 74, 75, 77, 85, 86, 105,
109,110,
134, 70.
– ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म खंड 4,
115/86-88
कृष्ण का सम्बन्ध अनेक नारियों से रहा हैं
कृष्ण
की विवाहिता पत्नियों की संख्या सोलह
हज़ार एक
सो आठ बताई जाती हैं. धार्मिक क्षेत्र में
कृष्ण के साथ
राधा का नाम ही अधिक प्रचलित हैं. कृष्ण
की मूर्ति के साथ प्राय: सभी मंदिरों में
राधा की मूर्ति हैं. लेकिन आखिर ये
राधा थी कौन?
ब्रह्मावैवर्त पुराण राधा कृष्ण
की मामी बताई गयी हैं.
इसी पुराण में राधा की उत्पत्ति कृष्ण के
बाए अंग से
बताई गयी हैं
‘कृष्ण के बायें भाग से एक कन्या उत्पन्न हुई.
गुडवानो ने
उसका नाम राधा रखा.

– ब्रह्मावैवर्त पुराण, 5/25-26
‘उस राधा का विवाह रायाण नामक वैश्य
के साथ कर
दिया गया कृष्ण
की जो माता यशोदा थी रायाण
उनका सगा भाई था.

– ब्रह्मावैवर्त पुराण, 49/39,41,49
यदि राधा को कृष्ण के अंग से उत्पन्न माने
तो वह
उसकी पुत्री हुई . यदि यशोदा के नाते
विचार करें
तो वह कृष्ण की मामी हुई.
दोनों ही दृष्टियो से
राधा का कृष्ण के साथ प्रेम अनुचित था और
कृष्ण ने
अनेको बार राधा के साथ सम्भोग
किया था ( ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म
खंड 4,
अध्याय 15) और यहाँ तक विवाह भी कर
लिया था (ब्रह्मावैवर्त पुराण, कृष्णजन्म
खंड 4,
115/86-88).
मित्रो मैन ईस पोस्ट मे कुछ भी गलत नही कहा है.. सारी बाते भविष्य पुरानों के अनुसार प्रमाणीत है.. गलीया गलोच और भगवानो की वकालत करने से पेहले भविष्य पुरानों मे ईसकी जांच करे धन्यवाद..

तो कभी मत्स्य अवतार हुआ

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1. मत्स्यावतार: आर्यों के वेदों और पुराणों में वर्णित मत्स्य अवतार का गहन अध्ययन करने से और हजारों शोधों का अध्ययन करने से पता चलता है कि यह एक झूठी कहानी है। ना तो कभी मत्स्य अवतार हुआ और ना ही आज तक पूरी दुनिया में कोई ऐसा इंसान हुआ जो व्हेल मछली जैसी भीमकाय मछली को अपने वश कर सके। ब्राह्मणों ने मत्स्य अवतार बना कर पहली ईसवी से उन्नीस ईसवी तक के समय में तो मूल निवासियों को मुर्ख बना लिया लेकिन आज बीसवीईसवी में किये गए हजारों शोधों से यह बात साबित हो गई है कि मत्स्य अवतार की कथा सिर्फ एक झूठ है। तो सच क्या है?
सच यह है कि ईसा से 3200 साल पहले यूरेशिया में एक क्रूर जाति उत्पात और विनाश मचाती रहती थी। जिस का नाम “मोगल” था। वहां के शासकों ने उस जाति के सभी आदमियों को पकड़ कर एक बड़ी नाव में बिठा कर बीच समुद्र में छोड़ दिया, और आशा की कि यह जाति समुद्र में दफ़न हो जाये। लेकिन यह भारत जिसको उस समय चमार-दीप कहा जाता था, का दुर्भाग्य था, कि मोगल जाति के लोग भारत में पहुँचे। इसी से मत्स्य अवतार का उदय हुआ। कई दिनों तक समुद्र में भटकने के बाद युरेशियनों को जमीन दिखाई दी थी। इसी से युर्शियनों ने ये कल्पना भी गढ़ी थी कि धरती पानी में स्थित है। 19वी सताब्दी तक सारे भारत के मूल निवासी यही मानते थे कि धरती पानी में है। युरेशियनों ने मत्स्य अवतार की कहानी अपने आप की श्रेठ साबित करने के लिए गढ़ी थी और अपने आपको देवता सिद्ध कर दिया था। बाद में इस कहानी को आगे पीछे कर के वेदों और पुराणों में स्थापित किया गया ताकि किसी को सच्चाई पता ही ना चले। ना तो कभी मत्स्य अवतार हुआ, और ना ही यूरेशियन देवता थे। आज ये सच्चाई साडी दुनिया जानती है।
2. कुर्मावतार: वेदों और पुराणों में लिखी हुई कुर्मा अवतार की कहानी भी मत्स्य अवतार की तरह सिर्फ एक झूठ ही है। जब कभी समुद्र मंथन ही नहीं हुआ, तो कुर्मा अवतार कैसे हो गया? अगर कुछ लोग यहाँ सवाल करे तो उन से हमारे कुछ सवाल है: 1. क्या यूरेशियन पानी पर चलते थे? 2. यूरेशियन पानी पर चलते थे तो वह कौन सी तकनीक थी? 3. अगर असुर अर्थात राक्षस भी थे, तो असुर को पानी पर चलने की तकनीक कैसे चली? पानी पर चलने की तकनीक पर तो यूरेशियन आर्यों का एकाधिकार था। 4. अगर यूरेशियन आर्य धनवंतरी ने ही अमृत लाना था तो आर्यों ने खुद अपने आर्य भाई धनवंतरी को अमृत लेन को क्यों नहीं कहा? 5. असुरों और आर्यों ने सुमेरु पर्वत को कैसे समुद्र में स्थापित किया और सुमेरु पर्वत को वापिस उसी जगह कौन रख कर गया? 6. लक्ष्मी अपनी जवानी तक समुद्र में क्या कर रही थी? 7. युरेशियनों ने तो अमृत पिया था, तो वो मर क्यों गए? आज तक उस समय का कोई आर्य जिन्दा क्यों नहीं नहीं है? तो इन सभी सवालों का यह अर्थ निकालता है की समुद्र मंथन कभी नहीं हुआ। यह एक काल्पनिक कहानी है। असल में असुर और आर्यों के संग्राम में आर्यों को हार का मुह देखना पड़ा। सारे आर्य डर के मारे समुद्र के किनारे जा छुपे, और भारत (चमार दीप) छोड़कर भागने वाले थे। उस समय धुर्त विष्णु नाम के आर्य ने कछुए वाली निति अपनाई और कछुए के समान शांत रह कर मूल निवासियों के साथ संधि कर ली। यह संधि आर्यों के लिए अमृत के समान सिद्ध हुई, और आर्यों को भारत (चमार दीप) को नहीं छोड़ना पड़ा। यह संधि समुद्र के किनारे बहुत दिनों के विचार विमर्श के बाद हुई थी इसीलिए समुद्र के किनारे किये गए विचार विमर्श को समुद्र मंथन और उस से निकले परिणाम को आर्यों ने अमृत कहा। कुर्मा अवतार की कहानी तो बाद में युरेशियनों ने अपनी महानता सिद्ध करने के लिए गढ़ी थी। उस समय वह ना तो कोई समुद्र मंथन हुआ और ना ही कोई अमृत नाम की चीज या पेय पदार्थ निकला था। ना समुद्र मंथन हुआ, ना अमृत निकला, अपनी हार को भी इन विदेशी ब्राह्मणों ने अपनी महानता में बदल दिया।
3. वराह अवतार: वराह अवतार की कथा भी हिन्दू पुराणों में बहुत ही गलत ढंग से बताई गई है, जिसमें बताया गया कि हिरणायक्ष ने धरती को चुरा लिया था। धरती को चुरा कर हिरणायक्ष ने पानी में छुपा दिया। विष्णु सूअर बना और हिरणायक्ष को मार कर विष्णु ने धरती को पानी से बाहर अपने दांतों पर निकला। अब यह कितना सत्य है यह तो पाठकगण पढ़ कर ही समझ गए होंगे। बिना बात को घुमाये आप लोगों को सची घटना के बारे बता देते है। असल में हुआ यूँ था की हिरणायक्ष दक्षिण भारत के प्रायद्वीपों का एक महान मूल निवासी राजा था। जिसने सभी यूरेशियन आर्यों को दक्षिण भारत में मार और डरा कर सभी द्वीपों भगा दिया था। देवताओं ने बहुत सी युक्तियाँ लगा ली थी परन्तु हिरणायक्ष एक अपराजय योद्धा था, जिसे कोई भी आर्य प्रत्यक्ष युद्ध में हरा नहीं सकता था। हिरणायक्ष ने सारी दक्षिण भारत के सभी द्वीपों पर अपना अधिपत्य स्थापित कर दिया था। दक्षिण भारत में और उसके आस पास के द्वीप पानी में स्थित थे और आर्यों का उन द्वीपों पर से राज्य समाप्त हो गया था। तो इस घटना को पृथ्वी को पानी के अन्दर ले जा कर छुपाना प्रचारित किया गया। हिरणायक्ष को हराने के लिए एक बार फिर विष्णु ने छल कपट का सहारा लिया और हिरणायक्ष को युद्ध करने समुद्र में ललकारा। पानी में युद्ध करते समय विष्णु ने धोखे से हिरणायक्ष के सर के पीछे वार किया और हिरणायक्ष को मार दिया। हिरणायक्ष को मारने के बाद आर्यों का कुछ द्वीपों पर फिर से राज्य स्थापित हो गया। मूल निवासी कभी इस घटना की सच्चाई ना जन ले इस लिए आर्यों ने विष्णु को भगवान् और हिरणायक्ष को राक्षस या असुर बना कर आम समाज के सामने प्रस्तुत किया। अब अगर विज्ञान की ओर से भी इस घटना का विश्लेषण किया जाये तो पता चलता है कि यह घटना एक दम काल्पनिक है। क्योकि समुद्र धरती पर है ना की धरती समुद्र में। तो यहाँ प्रश्न उठता है अगर हिरणायक्ष ने धरती को समुद्र में छुपाया तो कैसे? इतना बड़ा समुद्र कहा है जिस मैं पृथ्वी समा सके? ना तो कोई विष्णु अवतार हुआ और ना ही पृथ्वी को पानी के अन्दर छुपाया गया। यह सिर्फ मूल निवासियों को मुर्ख बनाने की चाल मात्र थी।

समुद्र मंथन

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मित्रो यह पूरा पोस्ट ध्यान से पडे ।।।

समुद्र मंथन दुनीया के सबसे बडे गप्पो मेसे एक,

दैत्यराज बलि का राज्य तीनों लोकों पर था। इन्द्र सहित देवतागण उससे भयभीत रहते थे। इस स्थिति के निवारण का उपाय केवल विष्णु ही बता सकते थे, अतः ब्रह्मा जी के साथ समस्त देवताभगवान विष्णु के पास पहुचे !

उन्होंने भगवान विष्णु को अपनी विपदा सुनाई। सब सुन कर विष्णु बोले तुम दैत्यों से मित्रता कर लो और क्षीर सागर को मथंन कर उसमें से अमृत निकाल कर पान कर लो। दैत्यों की सहायता से यह कार्य सुगमता से हो जायेगा।
इस कार्य के लिये उनकी हरशर्त मान लो और अन्त में अपना काम निकाल लो !! अमृत पीकर तुम अमर हो जाओगे और तुममें दैत्यों को मारने का सामर्थ्य आ जायेगा।
दैत्यराज बलि ने देवराज इन्द्र से समझौता कर लिया और समुद्र मंथन के लिये तैयार हो गये। मन्दराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकी नाग को नेती बनाया गया।
स्वयं भगवान श्री विष्णु कच्छप अवतार लेकर मन्दराचल पर्वत को अपने पीठ पर रखकर उसका आधार बन गये !!

“समुद्र मंथन आरम्भ हुआ और समुद्र मंथन से निम्न चिजे निकली !!
1:- सबसे पहले जल का हलाहल विष निकला, विष को शंकर भगवान के द्वारा पान कर लिया गया उनका गला निला फड़ गया ।
2:- दूसरा रत्न कामधेनु गाय निकली जिसे ऋषियों ने रख लिया।
3:- फिर उच्चैःश्रवा घोड़ा निकला जिसे दैत्यराज बलि ने रख लिया।
4:- उसके बाद ऐरावत हाथी निकला जिसे देवराज इन्द्र ने ग्रहण किया।
5:- ऐरावत के पश्चात् कौस्तुभमणि समुद्र से निकली उसे विष्णु भगवान ने रख लिया !!
6:- फिर कल्पद्रुम निकला और रम्भा नामक अप्सरा निकली। इन दोनों को देवलोक में रख लिया गया।
7:- फिर समु्द्र को मथने से लक्ष्मी जी निकलीं। लक्ष्मी जी ने स्वयं ही भगवान विष्णु कोवर लिया।
8:- फिर एक के पश्चात एक चन्द्रमा, पारिजात वृक्ष तथा शंख निकले और अन्त में धन्वन्तरि वैद्य अमृत का घट लेकर प्रकट हुये।
मित्रो आप खुद समझ सकते हो कि ये कितनी बडी बकवास है, पुरी तरह काल्पनिक और अवैग्यानिक है।।
कितनी अजीब बात हे कि जब भगवान को भी कुछ चाहीये होती तो उन्हे भी महनत करना पडी ।।
वैसे तो समुर्द का मंथन करना कि एक महा गप है ।। फिर भी कुछ बेचारे लोग न चाहते हुए भी इसगप्पे को सच मानते है, इस पर स्वभाविक रुप से मेरे मन मे जो संकाये पैदा हो रही है वो कुछइस प्रकार है ।।
1:- सबसे पहले कि स्मुद्र का मंथन किया जा रहा है तो क्या यह समुद्र के किनारे प किया गया या फिर बिच गहराई मे, किनारे पर तो होगा नही तो बिच गहाराई मे किया गया तो देवता तो ठिक लेकीन सभी राक्षसो को भी पानी पर चलना आता था क्या ??
2:- समुद्र का मंथन करने से विष निकला ????
समुद्र का मंथन करने से अगर नमक निकलने की बात कही गयी होती तो बात कुछ हजम भी हो जाती,
और शंकर भगवान ने विष पिया तो उनका गला निला पड गया, इसका मतलब विष बहुत जहरीला था, भगवान अगर और अधीक मात्रा मे पि लेते तो न जाने क्या अनर्थ हो जाता ।।
3:- कामधेनु गाय उच्चैःश्रवा घोड़ा और् एरावत हाथी समुद्र से निकले ये क्या मजाक है, अगर किसी मछली के निकलने की बात होती तो एक बार समझ आता,
बेचारे मछुआरो कि जिन्दगी बीत जाती है समुद्र मे जाल फेंकते हुए उन्हे तो आज तक मछली और केकड़ो के अलावा कुछ नही मिला समुद्र से ???
4:- लक्ष्मी जी भी समुद्र मंथन से निकली, तो जवान होने तक लक्ष्मी जी समुद्र मे क्या कर रही थी, समुद से निकलने के बाद का उनके जिवन का लेखा झोखा है लेकीन उनके स्मुद्र के अंदर व्यतीत किये जिवन का लेखा जोखा क्यो नही है???
समुद्र से निकलते हि विष्णू ने लक्ष्मी से शादी करली तो कही एसा तो नही कि य सब लक्ष्मी को समुद्र से निकालने कि विष्णू की चाल तो नही थी????
5:- फिर चंद्र्मा भी समुद्र मंथन से निकला, मित्रो इस बात ने तो गप्पो की हद पार कर दि,चंद्रमा जितना बड़ा ग्रह जो आकार मे प्रथ्वी का एक चौथाई है, वो समुद्र से कैसे निकल सकताहै ???
6:- आखीरी मे समुद्र से अंम्रत का घडा लेकर धन्वंतरी देव निकले, धंनतरी भी तो देवता हि थे तो जब देवताओ को अंम्रत पीना हि था तो सिधा धन्वतरी देव से कह देते वो खुद अंम्रत लेकर आजाते उसके लिये ये सब झमेला करने की क्या जरुरत थी???
या फिर देवताओ के बिच इतना संमर्क भी नही था ???

वेञ्यानीक तौर पर ईसै सच साबीत करने के सबुत ऐन्टीनाधारीओ के पास हो तो पेश करे

कृष्ण की रास लीलाएं, छल-कपट, साजिशें

ये सच है पाठको कि गीता में कही गई कुछ बातें विवादास्पद और महाभारत जंग, अय्याशी, जुआ, मक्कारी, छल-कपट और अपनों के साथ मार-काट, व बुजुर्गों को भी मत बख्शो जैसी बातों से परिपूर्ण है। रूस का गीता को प्रतिबंधित करने की कवायद सार्थक मानी जा सकती है क्योंकि गीता के कुछ संदेश निगेटिव तरीके से भी लिए जा सकते हैं और आज भारत का नागरिक इन्हीं निगेटिव चीजों को हाथों-हाथ ले रहा है और मैं ये भी बताऊँगा कैसे इसकी वजह से समाज विक्षिप्त हो चला है और जहाँ तहां देखो इसके सत्संग के सिवा और उसके दुष्प्रभाव के अलावा और कुछ नजर नहीं आता है सही पूछो तो इन धार्मिक ग्रंथों के ऐसे ही कुछ हिस्सों की वजह से ही समाज दूषित हो गया है वो कैसे ये आप भी जानते हो और मैं भी अगर आप मेरी नजर से इन धार्मिक ग्रंथो के प्रभाव को जानोगे तो आपको सब कुछ शीशे की तरह साफ़ नजर आएगा. न्यूज़ पेपर आप भी पढते हो और मैं भी। 

कृष्ण की रास लीलाएं व छल-कपट तथा साजिशें

सबसे पहले में मैं कृष्णा पर ही बात करता हूँ जिसके चरित्र का हमारे समाज पर गहरा प्रभाव है वो नकारात्मक जिस तरह से कृष्ण जी ने रासलीलाएं रचाई है ठीक उसी प्रकार आम इंसान भी समाज में रासलीलाएं रचा रहा है यानी घरवाली और बाहर वाली एक नहीं कई-कई बाहरवाली रखने की जुगत में रहता है जैसे की शायद उडीसा के एक साहब थी जिन्होंने दर्जनों बीवियां रखी हुई थी कुल मिलकर डेढ़ सौ सदस्यों का परिवार है एक अकेले का उसगरीब की तो कहानी सार्वजनिक हो चुकी मगर हमारे समाज में कुछ ऐसे सरमायेदार है जो गुप्त रूप से कई-कई रखैल रखे हुए है और उनके मुकद्दमें भी चल रहे है और कैद भी हो चुकी जैसे की मदेरणा साहब, अमरमणि और सुशिल शर्मा वगैरा…मुझे यहाँ जयादा लिखने की जरुरत नहीं है हर पढ़ा-लिखा नागरिक इनके बारे में जानता है कुछ की तो अय्याशियाँ सार्वजानिक ही नहीं हुई है रही आम जन की बात आप आये दिन टीवी में मियाँ-बीवी की जूत-पजार गाहे-बगाहे देखते ही रहते हो और रही टीनेजर्स की बात तो ये भी किसी से कम नहीं है मतलब कहने का कई-कई गर्ल फ्रेंड्स रखने का ट्रेंड सा निकल पड़ा है और इनका एंड एक भयानक त्रासदी पर जाकर ही दम लेता है मैं किसी को क्या कहूँ मैंने भी एक ही समय में चार-चार बाहरवाली रखी हुई थी मैं भी कृष्णा से ही प्रेरित था मेरा भी अपनी बीवी से यही कहना होता था जब कृष्णजी कई-कई रख सकते है तो मैं क्यूँ नहीं रख सकता इस पर मेरी पत्नी भी किसी और के चक्कर में पड़ गई और जब मुझे पता लगा तो मैंने कहा तू अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगी तो उसका सीधा सा जवाब था आप का जेल आना जाना लगा रहता है तो मैं क्या करूँ मैं भी द्रोपदी बन गई इसमें हर्ज ही क्या है जब आप कृष्ण बन सकते हो तो मैं भी द्रोपदी बन सकती हूँ बाकि कहानी आप अपने आप समझ लेना अब रही बात छल-कपट और साजिशों की तो वो हमें घर में टीवी के जरिये देखने को मिल ही रही है ये सीरिअल भी गीता और महाभारत की कारगुजारियों से लैस होते है इसमें आपको शक हो सकता है मुझे तो कम से कम नहीं है. आज समाज में जिसे भी देखो वो कृष्ण को ही फोलो कर रहा है फिर चाहे वो जाने अनजाने ही कर रहा हो. एक चीज और जो मैंने एनबीटी में पढ़ी फरीदाबाद में एक साले ने अपने जीजा को निबटा दिया उसने प्रण किया था कि जब तक वो उसे निबटा नहीं देगा तब तक नंगे पैर रहेगा, घातक फिल्म आप सभी ने देखी होगी उसमें भी साला कात्या का नाश करने के बाद ही अपने बदन पर कमीज पहनता है ये तो बानगी भर है जो कि द्रोपदी से प्रेरित है या भीम से प्रेप्रित है शायद  भीम ने भी ऐसी ही कुछ कसम खाई थी कोई बाल ना कटाने की कसम खता है तो कोई चोटी ना बाँधने की कसम खाता है जैसे कि चाणक्या. जेल में इस तरह के कई बंदे है एक बन्दा बी.डी. बण्डल थ�� जेल न.तीन में जिसने कसम खाई थी की जब तक वह अप��ी भाभी के बलात्कारी की मुंडी काटकर बिहार नहीं लाएगा तब वो चैन से नहीं बैठेगा और उसने किया भी रेल में पकड़ा गया और पीपे में मुंडी बरामद हुई थी अब आप ही बता सकते हो कि गीता से प्रेरित होने वाले या महाभारत घातक हुई या नहीं. 

जुआ प्रसंग

अब जुए की बात करते है आज हमारे समाज में सट्टे का प्रचलन चल पड़ा है जुए के कारण कई घर-परिवारों में रोटी तक के भी लाले पड़े हुए है और बातों की तो छोडो और ज्यादा असर क्रिकेट की वजह से पड़ा है बस जुए का प्रारूप बदला है तरीका वही है टेक्नीक का विकास होने वजह से सब-कुछ गुप-चुप तरीके से सब चलता रहता है नतीजा कोई बीवी पति को छोड बच्चों समेत सुसाइड कर लेती है तो कोई खुद ही मौत को गले लगा लेती है और तो और कोई-कोई पति तो ऐसे होते है जो पूर परिवार को जहर देकर खुद भी जहर खाने को मजबूर हो रहे है कोई तमोला, पपलू, रम्मी तो कोई सट्टे में मशगूल है अब आप ही बताओ ये गीता का असर नहीं है तो क्या है और तो कई केस तो आपको ऐसे भी मिल जायेंगे जहां घर-बार की तो छोडो अपनी बीवी तक को दाव पर लगाने से बाज नहीं आते है. अब आप ही बताओ ये गीता-महाभारत का असर नहीं है तो किसका है

गुरुद्रोनाचार्य भीष्मपिताम और तो सब बातें छोडो महाभारत की वजह से गुरुओं दादा-दादी और बुजुर्गों की जान पर बन आई है प्रापर्टी के लालच में आज के टीनेजर या फिर चाहे शादीशुदा हों अपने बुजर्गों और दादा-दादी की जान लेने पर उतारू है और स्टूडेंट अपने टीचरों और प्रोफेसरों की जान ले लेने पर अमादा है यानी सब कुछ कुछ बर्दास्त के बाहर हो चला है आज के परिवेश में छात्र तमंचा लेकर स्कूल पहुँच जाता है पोता दादा-दादी की गला घोटकर हत्या कर देता है बेटा अपने बाप को ही चलता कर देता है बेटी अपनी अपने बाप को ही गड्डी चढ़ा दे रही है. अब यहाँ भी आप ही बताओ महाभारत का असर नहीं है तो फिर ये किसका असर है पुलिस दिन रात बुजुर्गों की सेफ्टी के लिए घोड़े दौड़ा रही है मगर हालात है काबू में आने का नाम नहीं ले रहे है उधर दिल्ली का पुलिस कमिश्नर परेशान है तो कहीं ट्रैफिक कमिश्नर परेशान तो कहीं सरकार परेशान हो रही है कि आखिर ये हो क्या रहा है (हो क्या रहा है सब महाभारत के असर हो रहा है) इसका आसान सा सोलूशन मेरे पास है क्यूँ ना इसकी जड़ तक जाया जाये इसकी सारी जड़ है यही धार्मिक ग्रंथ या पौराणिक ग्रंथ. अब आपकी क्या राय है आप जाने मैंने तो अपनी राय बता दी है और मुझे पक्का यकीन है आप मेरी तरह बेबाकी से अपने बारे में बता भी नहीं सकते.

 

भगवान क्यों और कैसे : नायक या खलनायक?

अब हम असल मुद्दे पर आते है.अभी तक हम इन देवताओं की ब्राइट साइड के विषय में पढ़ते सुनते और देखते आये लेकिन मैं आपको बताऊंगा इनकी डार्क साइड  के बारे में दोस्तों मैंने जब इनका गहराई से अध्यन किया तो आप यकीं मानना मेरा दिमाग ही हिल गया और भगवानों के विषय में विचार करने के लिए मजबूर हो गया आप मेरे साथ बने रहिएगा और अपनी बेबाक राय अवश्य दीजियेगा. भले ही वो अश्लील ही क्यों न हो. मैं आपसे निष्पक्ष राय की उम्मीद करता हूँ मुझे आशा है आप मुझे निराश नहीं करेंगे हाँ एक बात और मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचने का कतई मकसद नहीं है हाँ अपनी बेबाक राय जरुर रखना चाहता हूँ क्योंकि मैं एक लोकतान्त्रिक देश का वासी हूँ और मुझे पूरा हक़ है अपने विचार रखने का और कोर्ट भी यही कहती है की “आप धरम की निंदा तो कर सकते हो मगर उससे नफरत नहीं.” तो फिर हो जाइये तैयार एक सच का सामना करने के लिए और लिखयेगा खुले दिमाग से कम्मेन्ट्स.

भगवत गीता में शलोक 3/21 में लिखा है.”यध्य…………………..वर्त्तते. अर्थात एक महापुरुष जो करता है उसी का हम सभी अनुशरण करते है. आचार्य रजनीकांत  शास्त्री अपने ग्रन्थ हिन्दू जाती का उत्थान और पतन में लिखते है सभी जीवों में सबसे पहले देवताओं की कोटि है क्योंकि उन्ही को हम लोग परम अराध्य,परम पूजनीय और सभी फलदायी मानते है उनके पवित्र नामों की रट हम हमेशा  लगाये रहते है की ऐसा करने से ही हमें इस तापत्रय जिन्दगी से मुक्ति मिलेगी. इन्ही देवताओं की बानगी पेश कर रहा हूँ ध्यान दीजियेगा. सबसे पहला नाम इसमें विष्णु का आता है असुरेंदर जालंधर की पत्नी का सतीत्व अपहरण करके उसके पति को छल से मारने वाला क्या भगवान कहलाने का हक़दार है? पौराणिक शिव अर्थात महादेव भगवान कहलाने के हक़दार है जो मोहिनी के पीछे-पीछे कामुक सांड की तरह भागा-भागा फिरता था.? क्या ब्राहमणों का पुरखा ब्रह्मा जिसके मुख से ब्रह्माण अपने को उत्पन्न मानते है भगवान कहलाने का हक़दार है जिसने अपनी ही बेटी सरस्वती से बलात्कार किया.?क्या देवों का गुरु  ब्रहस्पति भगवान कहलाने का हकदार है जिसने छोटे भाई की गर्भवती पत्नी ममता के साथ बलात्कार किया. क्या देवों का राजा इन्द्र “भगवान” कहलाने का हक़दार है जिसने छिपकर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या के साथ बलात्कार किया था.?क्या ब्रहस्पति के चेले चन्द्र भगवान् कहलाने के हक़दार है जिन्होंने गुरु की पत्नी तारा का अपहरण करके उससे पुत्र उत्पन्न कर दिया था जिसका नाम बुध था.? क्या हिन्दुओं के पौराणिक सूर्य देव भगवान् कहलाने के हकदार है जिन्होंने कुआंरी कुंती से कर्ण नाम का पुत्र उत्पन्न कर डाला जो एक शुद्र द्वारा पाला पोशा गया जिसके कारण कर्ण को हर बार अपमानित होना पड़ा था.क्या हिन्दुओं के पौराणिक महापुरुष श्री कृषण भगवान कहे जाने के हकदार है जो नहाती हुई गोपियों के वस्त्र चुराकर पेड़ पर चढ़ जाते है.? मेनका का प्रेमी विश्वामित्र क्या भगवान कहलाने के हक़दार है.? नाव में भोग करने वाला महर्षि पराशर क्या भगवान कहलाने के हकदार है.?अप्सरा के प्रेमी क्या  भरद्वाज इसके हकदार है.?क्या शराबी बलराम जो रेवती की कन्या केतकी के मुहं से निकले कुल्ले को भी घोटकर पी जाया करते थे क्या वाकई भगवान कहलाने के हक़दार है.(ये सारा संकलन एस आर बाली जी ने वेद शास्त्रों और भगवत गीता से लिया है इसका वर्णन मौजूद है)इन सब की आगे की कहानी डिटेल में जानने के लिए मेरा अगला ब्लाक अवस्य पढ़े व् अपनी बेबाक राय देना ना भूले.

क्या राम भगवान था ?

क्या राम भगवान था ?
में राम को सिर्फ एक राजा समझता हु क्योकि एक भगवान कभी भी किसी का सहारा नहीं लेता जिस छल कपट से उसने रावन जेसे योधा को मारा वो यही सिद्ध करता है के राम भगवान हो ही नहीं सकता
क्या आप में से कोई भी इस कथन से सहमत है के एक भगवान की आधी ज़िन्दगी जंगल में बंदरो और भालुओ के साथ गुज़री और तो और एक भगवान अपनी पत्नी को ढूँढने तक में सक्षम नहीं था इसीलिए बंदरो और भालुओ का सहारा लेकर एक साहसी योधा को पीठ पीछे वार करके मारा ! यह सारे गुण किसी भगवान के चरित्र को नहीं दरशाते बल्कि किसी भी व्यक्ति के देवालीयेपन का सबूत देते है

सीता की अग्नि परिक्षा इस बात का सबूत है के राम बुरा पति ही नहीं बल्कि एक शक्की मानसिकता का रोगी भी था जिसने सिर्फ एक मछुआरे की बात मानकर सीता को अग्नि मै छलांग लगाने के लिया कहा यह केसी मर्यादा है उस मर्यादा पुरूषोत्तम की के एक भगवान होकर भी वोह अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता रहा रावन के साथ 2 वर्ष बिताने के बाद सीता कभी राम के साथ खुश नहीं रही और हमेशा राम ने उसका उत्पिरण किया

क्या एक भगवान को किसी राक्षस से युद्ध की ज़रुरत पड़ सकती है अगर है तो भगवान तो सारी सृष्टि का रचयेता है उसी ने मनुष्य राक्षस असुरो को बनाया फिर भी वोह भालू और बंदरो की फ़ौज लेकर एक योधा से लड़ा और उसके भाई को सत्ता और कुर्सी का लालच देकर साथ मिलाया!
आज यह लक्षण हमारी राजनीती मै देखने को मिलते है जो राम ने हज़ारों साल पहले करे

मुझे जवाब चाहिए अगर मेने कुछ ग़लत लिखा हो तो! मेरा अनुरोध है उनलोगों से जो राम को भगवान मानते है कृपया करके सवालो का जवाब दे राम की भाषा का इस्तेमाल न करे

Mystery Behind Adam Bridge/Rama’s Setu

Mystery Behind Adam Bridge/Rama’s Setu

“Adam’s Bridge also known as Rama’s Bridge or Rama Setu is a chain of limestone shoals, between Pamban Island, also known as Rameswaram Island, off the southeastern coast of Tamil Nadu, India, and Mannar Island, off the northwestern coast of Sri Lanka. Geological evidence suggests that this bridge is a former land connection between India and Sri Lanka.

The bridge is 18 miles (30 km) long and separates the Gulf of Mannar (southwest) from the Palk Strait (northeast). Some of the sandbanks are dry and the sea in the area is very shallow, being only 3 ft to 30 ft (1 m to 10 m) deep in places, which hinders navigation. [ It was reportedly passable on foot up to the 15th century until storms deepened the channel: temple records seem to say that Rama’s Bridge was completely above sea level until it broke in a cyclone in 1480 CE.

The earliest map that calls this area Adam’s bridge was prepared by a British cartographer in 1804, probably referring to an Islamic legend, according to which Adam used the bridge to reach Adam’s Peak in Sri Lanka, where he stood repentant on one foot for many hundred years, leaving a large hollow mark resembling a footprint. Both the peak and the bridge are named after this legend.

This bridge has been one of the most interesting one ‘whether this structure is natural or manmade.

I am not taking away any Credit whether it was built by Rama with the help of Vanara Sena [Monkey’s army] to reach Sri Lanka to fight against demon King Ravana or it is naturally created or some other person constructed it. This is just a 30 KMS Long Bridge, Almighty Allah [God] has given us more superior Brain compares to all his creation. So we have already reach Moon and Now planning to go Planet Mars. Constructing 30 Kms long bridge was not a big deal.

British, French, Spanish, Portuguese crosses 7 Seas or Ocean and travelled thousands of miles in order to reach India,

Brothers and Sisters

If Hanuman had got super natural power to alter his size and according to legend as stated above that he had already tried to ate the Sun when he was just a child. The diameter of Sun is 1.4 million kilometer, In order to eat sun, Hanuman has to increase his mouth size more 1.4 million kilometer, If the above legend is true, Then why Rama had to build the bridge between India and srilanka,

If even Hanuman could increased his body size and put his finger tip on sea between India and Sri Lanka, itself be enough for Rama and Vanara sena to cross the Sea between two countries

According to the legend Hanuman is capable of flying. So he could just increase his body size and could took Rama and Vanara Sena in just Palm of one hand and easily flown to Sri Lank.

If Hanuman had not got any super power then Ram himself may just built a huge boat or some large size boats with help of Varana Sena and easily crossed 30 Kms long Sea.[Because In Mastya Purana Vishnu already had constructed the huge Boat to help Vaivasvata Manu in order to sea save Humanity]”