तो कभी मत्स्य अवतार हुआ

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1. मत्स्यावतार: आर्यों के वेदों और पुराणों में वर्णित मत्स्य अवतार का गहन अध्ययन करने से और हजारों शोधों का अध्ययन करने से पता चलता है कि यह एक झूठी कहानी है। ना तो कभी मत्स्य अवतार हुआ और ना ही आज तक पूरी दुनिया में कोई ऐसा इंसान हुआ जो व्हेल मछली जैसी भीमकाय मछली को अपने वश कर सके। ब्राह्मणों ने मत्स्य अवतार बना कर पहली ईसवी से उन्नीस ईसवी तक के समय में तो मूल निवासियों को मुर्ख बना लिया लेकिन आज बीसवीईसवी में किये गए हजारों शोधों से यह बात साबित हो गई है कि मत्स्य अवतार की कथा सिर्फ एक झूठ है। तो सच क्या है?
सच यह है कि ईसा से 3200 साल पहले यूरेशिया में एक क्रूर जाति उत्पात और विनाश मचाती रहती थी। जिस का नाम “मोगल” था। वहां के शासकों ने उस जाति के सभी आदमियों को पकड़ कर एक बड़ी नाव में बिठा कर बीच समुद्र में छोड़ दिया, और आशा की कि यह जाति समुद्र में दफ़न हो जाये। लेकिन यह भारत जिसको उस समय चमार-दीप कहा जाता था, का दुर्भाग्य था, कि मोगल जाति के लोग भारत में पहुँचे। इसी से मत्स्य अवतार का उदय हुआ। कई दिनों तक समुद्र में भटकने के बाद युरेशियनों को जमीन दिखाई दी थी। इसी से युर्शियनों ने ये कल्पना भी गढ़ी थी कि धरती पानी में स्थित है। 19वी सताब्दी तक सारे भारत के मूल निवासी यही मानते थे कि धरती पानी में है। युरेशियनों ने मत्स्य अवतार की कहानी अपने आप की श्रेठ साबित करने के लिए गढ़ी थी और अपने आपको देवता सिद्ध कर दिया था। बाद में इस कहानी को आगे पीछे कर के वेदों और पुराणों में स्थापित किया गया ताकि किसी को सच्चाई पता ही ना चले। ना तो कभी मत्स्य अवतार हुआ, और ना ही यूरेशियन देवता थे। आज ये सच्चाई साडी दुनिया जानती है।
2. कुर्मावतार: वेदों और पुराणों में लिखी हुई कुर्मा अवतार की कहानी भी मत्स्य अवतार की तरह सिर्फ एक झूठ ही है। जब कभी समुद्र मंथन ही नहीं हुआ, तो कुर्मा अवतार कैसे हो गया? अगर कुछ लोग यहाँ सवाल करे तो उन से हमारे कुछ सवाल है: 1. क्या यूरेशियन पानी पर चलते थे? 2. यूरेशियन पानी पर चलते थे तो वह कौन सी तकनीक थी? 3. अगर असुर अर्थात राक्षस भी थे, तो असुर को पानी पर चलने की तकनीक कैसे चली? पानी पर चलने की तकनीक पर तो यूरेशियन आर्यों का एकाधिकार था। 4. अगर यूरेशियन आर्य धनवंतरी ने ही अमृत लाना था तो आर्यों ने खुद अपने आर्य भाई धनवंतरी को अमृत लेन को क्यों नहीं कहा? 5. असुरों और आर्यों ने सुमेरु पर्वत को कैसे समुद्र में स्थापित किया और सुमेरु पर्वत को वापिस उसी जगह कौन रख कर गया? 6. लक्ष्मी अपनी जवानी तक समुद्र में क्या कर रही थी? 7. युरेशियनों ने तो अमृत पिया था, तो वो मर क्यों गए? आज तक उस समय का कोई आर्य जिन्दा क्यों नहीं नहीं है? तो इन सभी सवालों का यह अर्थ निकालता है की समुद्र मंथन कभी नहीं हुआ। यह एक काल्पनिक कहानी है। असल में असुर और आर्यों के संग्राम में आर्यों को हार का मुह देखना पड़ा। सारे आर्य डर के मारे समुद्र के किनारे जा छुपे, और भारत (चमार दीप) छोड़कर भागने वाले थे। उस समय धुर्त विष्णु नाम के आर्य ने कछुए वाली निति अपनाई और कछुए के समान शांत रह कर मूल निवासियों के साथ संधि कर ली। यह संधि आर्यों के लिए अमृत के समान सिद्ध हुई, और आर्यों को भारत (चमार दीप) को नहीं छोड़ना पड़ा। यह संधि समुद्र के किनारे बहुत दिनों के विचार विमर्श के बाद हुई थी इसीलिए समुद्र के किनारे किये गए विचार विमर्श को समुद्र मंथन और उस से निकले परिणाम को आर्यों ने अमृत कहा। कुर्मा अवतार की कहानी तो बाद में युरेशियनों ने अपनी महानता सिद्ध करने के लिए गढ़ी थी। उस समय वह ना तो कोई समुद्र मंथन हुआ और ना ही कोई अमृत नाम की चीज या पेय पदार्थ निकला था। ना समुद्र मंथन हुआ, ना अमृत निकला, अपनी हार को भी इन विदेशी ब्राह्मणों ने अपनी महानता में बदल दिया।
3. वराह अवतार: वराह अवतार की कथा भी हिन्दू पुराणों में बहुत ही गलत ढंग से बताई गई है, जिसमें बताया गया कि हिरणायक्ष ने धरती को चुरा लिया था। धरती को चुरा कर हिरणायक्ष ने पानी में छुपा दिया। विष्णु सूअर बना और हिरणायक्ष को मार कर विष्णु ने धरती को पानी से बाहर अपने दांतों पर निकला। अब यह कितना सत्य है यह तो पाठकगण पढ़ कर ही समझ गए होंगे। बिना बात को घुमाये आप लोगों को सची घटना के बारे बता देते है। असल में हुआ यूँ था की हिरणायक्ष दक्षिण भारत के प्रायद्वीपों का एक महान मूल निवासी राजा था। जिसने सभी यूरेशियन आर्यों को दक्षिण भारत में मार और डरा कर सभी द्वीपों भगा दिया था। देवताओं ने बहुत सी युक्तियाँ लगा ली थी परन्तु हिरणायक्ष एक अपराजय योद्धा था, जिसे कोई भी आर्य प्रत्यक्ष युद्ध में हरा नहीं सकता था। हिरणायक्ष ने सारी दक्षिण भारत के सभी द्वीपों पर अपना अधिपत्य स्थापित कर दिया था। दक्षिण भारत में और उसके आस पास के द्वीप पानी में स्थित थे और आर्यों का उन द्वीपों पर से राज्य समाप्त हो गया था। तो इस घटना को पृथ्वी को पानी के अन्दर ले जा कर छुपाना प्रचारित किया गया। हिरणायक्ष को हराने के लिए एक बार फिर विष्णु ने छल कपट का सहारा लिया और हिरणायक्ष को युद्ध करने समुद्र में ललकारा। पानी में युद्ध करते समय विष्णु ने धोखे से हिरणायक्ष के सर के पीछे वार किया और हिरणायक्ष को मार दिया। हिरणायक्ष को मारने के बाद आर्यों का कुछ द्वीपों पर फिर से राज्य स्थापित हो गया। मूल निवासी कभी इस घटना की सच्चाई ना जन ले इस लिए आर्यों ने विष्णु को भगवान् और हिरणायक्ष को राक्षस या असुर बना कर आम समाज के सामने प्रस्तुत किया। अब अगर विज्ञान की ओर से भी इस घटना का विश्लेषण किया जाये तो पता चलता है कि यह घटना एक दम काल्पनिक है। क्योकि समुद्र धरती पर है ना की धरती समुद्र में। तो यहाँ प्रश्न उठता है अगर हिरणायक्ष ने धरती को समुद्र में छुपाया तो कैसे? इतना बड़ा समुद्र कहा है जिस मैं पृथ्वी समा सके? ना तो कोई विष्णु अवतार हुआ और ना ही पृथ्वी को पानी के अन्दर छुपाया गया। यह सिर्फ मूल निवासियों को मुर्ख बनाने की चाल मात्र थी।